स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि मनाई गयी।

स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि पर गुरुदेव को नमन एवं वंदन
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स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि मनाई गयी।

हिन्दू वैदिक सनातन धर्म-संस्कृति-संस्कार एवं भारत की दिव्य संवेदनाओ के सबल संपोषक, भारत माता मंदिर एवं समन्वय सेवा ट्रस्ट के संस्थापक, निवर्तमान जगतगुरु शंकराचार्य परम गुरुदेम ब्रहमलीन अनंत श्री विभूषित श्री स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि वैश्विक महामारी कोरोना के कारण सांकेतिक रूप से मनाई गयी। इस अवसर सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन करते हुये सामाजिक समरसता और राष्ट्र उत्थान को समर्पित उनके दिव्य और प्रेरक जीवन का पुण्य स्मरण किया गया।

ब्रहमलीन परम गुरुदेव की पावन स्मृति में समन्वय सेवा ट्रस्ट भारत माता मंदिर के अध्यक्ष जुनपीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज ‘’ आचार्यश्री ’’ एवं भारत माता मंदिर समन्वय सेवा ट्रस्ट के सचिव आइ॰ डी॰ शास्त्री द्वारा परम गुरुदेव की समाधि पर स्थित सद्गुरु स्वरूप ‘’ आत्मलिंग महादेव ‘’ का षोडशोपचार पूजन – रुद्राभिषेक किया गया।

पुण्य स्म्रति दिवस के अवसर पर आश्रम के अंत:वासियो, बटुकों और ब्रहम्चार्यों द्वारा सामुहिक श्रीमदभागवत गीता का पाठ आश्रम के संतो की उपस्थिती में किया गया।

ब्रहमलीन परम गुरुदेव का पावन पुण्य स्मरण करते हुये पूज्य गुरुदेव जुनपीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज ने कहा की महापुरुष विवेक – विचार और प्रेरणा के रूप मेँ हमारे मध्य रहते हैं। हमने अपने गुरुदेव में सप्तऋषियों, सनकादिक, नारद और आद्य शंकराचार्य जी के चेतन्य रूप का प्रतिपल दर्शन किया हैं। उनका दिव्य जीवन समन्वय को समर्पित रहा। अत: उन्होने भारत माता का मंदिर बनाकर भारत माता की उपासना की ।

पूज्य गुरुदेव समन्वयवादी थे। उन्होने भारत माता मंदिर में सप्तऋषियों समेत सभी संप्रदाय के आचार्यो भारत के अनेक महापुरुषों की प्रतिमाए स्थापित की। यह उनकी दिव्य एकात्मा, समन्वय द्रष्टि एवं राष्ट्रीय हितो के लिए प्रतिबद्धता का परिचायक हैं। गुरुदेव ऐसा कहते थे कि मै भारत माँ के उपासकों का भी उपासक हूँ। उनका स्मरण कर हम सब धन्यता का अनुभव कर रहे हैं।

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