सुविचार

June 23, 2020

सुखी होने के लिए पोजीटीव सोच रखनी होगी

अगर आप दुख पर ध्यान देंगे तो हमेशा दुखी रहेंगे और सुख पर ध्यान देंगे तो हमेशा सुखी रहेंगे क्योंकि यह जीवन का शाश्वत नियम है
June 8, 2020

सदाचार का साथ

ऐश्वर्यस्य विभूषणं सुजनता शौर्यस्य वाक्संयमो* ज्ञानस्योपशम: श्रुतस्य विनयो वित्तस्य पात्रो व्यय: । अक्रोधस्तपस: क्षमा प्रभवितुर्धर्मस्य निर्व्याजता सर्वेषामपि सर्वकारणमिदं शीलं परं भूषणम् ।।
June 7, 2020

विवेक के साथ कर्म करना

"लगन" व्यक्ति से वो करवा लेती है,           जो वह नहीं कर सकता...     "साहस' व्यक्ति से वो करवाता है,           जो वह कर सकता है...
June 6, 2020

प्रयत्न करते रहना

जय श्रीराधा कृष्णा। जय सीताराम समय सिर्फ आपको उस व्यक्ति से मिलाने का काम करता है जो नियती द्वारा निहित है,*
May 31, 2020

प्रयत्नशील रहें

प्रयास जीवन में लक्ष्य प्राप्ति की प्रथम शर्त है। जितना बड़ा लक्ष्य होगा प्रयास भी उसी अनुपात में होना चाहिए। इसलिए बड़े लक्ष्य को पाना हो तो आपका प्रयास भी बड़ा ही होना चाहिए।
May 30, 2020

व्यंग और आलोचना

यदि कोई आप पर व्यंग करता है, आलोचना करता है, तो बुरा मत मानें, व्यंग सफल लोगों के खिलाफ असफल लोगों का हथियार होता है।
May 29, 2020

संतोषी रहे सुखी रहे

भविष्य का भय सदैव केवल उनके लिए सताता है जो वर्तमान में भी संतुष्ट नहीं।
May 28, 2020

कर्मफल का सदैव त्याग करो

कर्मयोगी बनो मगर कर्मफल का सदैव त्याग करो, ये भगवान श्रीकृष्ण के जीवन की महत्वपूर्ण और प्रमुख सीखों में एक है।
May 27, 2020

सत्कर्मों से ही जीवन यात्रा मंगलमय रहेगी

जीवन में सब कुछ एक निवेश की तरह ही होता है। प्रेम,समय, साथ, खुशी, सम्मान और अपमान, जितना - जितना हम दूसरों को देते जायेंगे,
May 26, 2020

पुरुषार्थ

बिना पुरुषार्थ के हमारे महान से महान संकल्प भी केवल रेत के विशाल महल का निर्माण करने जैसे हो जाते हैं। हमारे पास संकल्प रूपी मजबूत आधार शिला तो होनी ही चाहिए मगर पुरुषार्थ रूपी पिलर भी होने चाहिए, जिस पर सफलता रुपी गगनचुम्बी महल का निर्माण संभव हो सके।
May 25, 2020

स्वयं के दोष और दूसरों के गुण देखना

आँख खोलकर दूसरों की बुराई देखने की बजाय आँख बंद करके स्वयं की बुराई को देखना ज्यादा बेहतर है। दूर दृष्टा बनो मगर दोष दृष्टा कभी मत बनो।
May 24, 2020

श्रेष्ठ कर्म

जिस प्रकार असली फूलों को इत्र लगाने की जरूरत नहीं होती वो तो स्वयं ही महक जाया करते हैं। उसी प्रकार अच्छे लोगों को किसी प्रशंसा की जरूरत नहीं होती। वो तो अपने श्रेष्ठ कर्मों की सुगंधी से स्वयं के साथ - साथ समष्टि को महकाने का सामर्थ्य रखते हैं।