

जीस प्रकार परेड में पीछे मुड़ बोलते ही, पहला आदमी आख़िरी नंबर पर और आख़िरी आदमी पहले नंबर पर आ जाता है…
ज़िंदगी में कभी भी आगे होने का घमंड और पीछे होने का गम ना करिए…
पता नहीं ज़िंदगी कब बोल दे “पीछे मुड़ “।
अतः लक्ष्य तय कर लक्ष्य की दिशा में बढ़ते हुए परीक्षा दूसरा सोपान है,सफलता का कोई बाई पास नहीं होता, वो तो सीढ़ी दर सीढ़ी ही चढ़कर ही प्राप्त करनी होती है,लक्ष्य प्राप्ति में आने वाली विघ्न बाधाएं ही आपकी परीक्षा है, लेकीन अगर आप मेदान में डटे रहे तों सफलता आपके साथ होगी । बस आप को सीधा लक्ष्य की ओर चलना हे ,दायें ओर बायें देखना बंद क़रना हे । मंज़िल आप के पास होगी ।।