विवेक के साथ कर्म करना
June 7, 2020श्री गणेश पंचमुखी गौशाला गोवला को मॉडल गौशाला बनाने का प्रयत्न
June 15, 2020
ज़य श्रीराधा कृष्णा । ज़यसीताराम
ऐश्वर्यस्य विभूषणं सुजनता शौर्यस्य वाक्संयमो*
ज्ञानस्योपशम: श्रुतस्य विनयो वित्तस्य पात्रो व्यय: ।
अक्रोधस्तपस: क्षमा प्रभवितुर्धर्मस्य निर्व्याजता
सर्वेषामपि सर्वकारणमिदं शीलं परं भूषणम् ।।
भावार्थ: ―
धन-सम्पत्ति की शोभा सज्जनता, शूरवीरता की शोभा वाक् संयम(बढ़-चढ़कर बातें न करना), ज्ञान की शोभा शान्ति, नम्रता, धन की शोभा सुपात्र में दान, तप की शोभा क्रोध न करना, प्रभुता की शोभा क्षमा और धर्म का भूषण निश्छल व्यवहार है। परन्तु इन सबका कारणरूप "शील=सदाचार" सर्वश्रेष्ठ भूषण है।
अतः कृपया सदाचार का साथ देवे । सदाचार से किया काम हमेशा आपके काम आँ पायेगा ओर ईश से कमाया धन ही सदा साथ देगा ।
JAI HIND । DESH PRATHAM