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May 25, 2020

स्वयं के दोष और दूसरों के गुण देखना

आँख खोलकर दूसरों की बुराई देखने की बजाय आँख बंद करके स्वयं की बुराई को देखना ज्यादा बेहतर है। दूर दृष्टा बनो मगर दोष दृष्टा कभी मत बनो।
May 24, 2020

श्रेष्ठ कर्म

जिस प्रकार असली फूलों को इत्र लगाने की जरूरत नहीं होती वो तो स्वयं ही महक जाया करते हैं। उसी प्रकार अच्छे लोगों को किसी प्रशंसा की जरूरत नहीं होती। वो तो अपने श्रेष्ठ कर्मों की सुगंधी से स्वयं के साथ - साथ समष्टि को महकाने का सामर्थ्य रखते हैं।
May 23, 2020

सहनशीलता, समर्पण और मौन

सहनशीलता, समर्पण और मौन आपकी उपयोगिता और मूल्य दोनों को बढ़ा देती है।
May 22, 2020

भगवद चिंतन