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सदाचार का साथ

ज़य श्रीराधा कृष्णा । ज़यसीताराम ऐश्वर्यस्य विभूषणं सुजनता शौर्यस्य वाक्संयमो* ज्ञानस्योपशम: श्रुतस्य विनयो वित्तस्य पात्रो व्यय: । अक्रोधस्तपस: क्षमा प्रभवितुर्धर्मस्य निर्व्याजता सर्वेषामपि सर्वकारणमिदं शीलं परं भूषणम् ।। भावार्थ: ― धन-सम्पत्ति की शोभा सज्जनता, शूरवीरता की शोभा वाक् संयम(बढ़-चढ़कर बातें न करना), ज्ञान की शोभा शान्ति, नम्रता, धन की शोभा सुपात्र में दान, तप की शोभा क्रोध न करना, प्रभुता की शोभा क्षमा और धर्म का भूषण निश्छल व्यवहार है। परन्तु इन सबका कारणरूप "शील=सदाचार" सर्वश्रेष्ठ भूषण है। अतः कृपया सदाचार का साथ देवे । सदाचार से किया काम हमेशा आपके काम आँ पायेगा ओर ईश से कमाया धन ही सदा साथ देगा । JAI HIND । DESH PRATHAM

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