स्वयं के दोष और दूसरों के गुण देखना
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सत्कर्मों से ही जीवन यात्रा मंगलमय रहेगी
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पुरुषार्थ

बिना पुरुषार्थ के हमारे महान से महान संकल्प भी केवल रेत के विशाल महल का निर्माण करने जैसे हो जाते हैं। हमारे पास संकल्प रूपी मजबूत आधार शिला तो होनी ही चाहिए मगर पुरुषार्थ रूपी पिलर भी होने चाहिए, जिस पर सफलता रुपी गगनचुम्बी महल का निर्माण संभव हो सके। कहना जीवन की माँग नहीं, करना जीवन की माँग है। महत्वपूर्ण ये नहीं कि आप अच्छा कह रहे हैं अपितु महत्वपूर्ण तो ये है कि आप अच्छा कर रहे हैं। सृजनात्मकता जीवन की माँग ही नहीं अपितु अनिवार्यता भी है। इसलिए केवल अच्छा कहना नहीं अपितु अच्छा करना भी हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। JAI HIND । DESH PRATHAM

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